सीपीआरआई

केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई)


अतिरिक्त ब्योरे के लिए कृपया साईट http://cpri.in सर्फ करें।

केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) की स्थापना सन् 1960 में भारत सरकार द्वारा बैंगलोर और भोपाल में की गई थी। यह विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में वर्ष 1978 में एक स्वायत्त सोसायटी बन गया। इस संस्थान के उद्देश्य विद्युत उपस्कर और उत्पाद विकास के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्रीय जांच एवं प्रमाणीकरण प्राधिकरण के रूप में कार्य करने के अतिरिक्त इलेक्ट्रिक विद्युत इंजीनियरी में अप्लाइड रिसर्च को और आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में कार्य करना है। इस संस्थान ने शॉर्ट सर्किट और हाई पावर, हाई वोल्टेज और अल्ट्रा हाई वोल्टेज, इन्सुलेशन, विद्युत प्रणाली, सामग्री, पारेषण लाइन टावर और एसेसरीज के क्षेत्रों में अद्यतन अनुसंधान और जांच सुविधाओं की स्थापना की है।

यह संस्थान 50 वर्ष पुराना है और विद्युत क्षेत्र को अपनी समर्पित सेवा के पांच दशक पूरा होने का समारोह मना रहा है और यह अंतर्राष्ट्रीय जांच घरों के बराबर है।

इस संस्थान का मुख्यालय तथा सबसे बड़ी प्रयोगशालाएं बैंगलोर में है। संस्थान की यूनिटें भोपाल, हैदराबाद, कोरादी, नोएडा, कोलकाता और गुवाहाटी में है।

प्रत्यायन

सीपीआरआई की प्रयोगशालाओं को निम्नलिखित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निकायों द्वारा प्रत्यापित किया गया है:

  • नेशनल एक्टेडीटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलीब्रेशन ऑफ लेबोरेटरीज (एनएबीएल), आईएसओ-17025,
  • मेम्बर ऑफ शार्ट सर्किट टेस्टिंग लायजन (एसटीएल) ऑफ यूरोप,
  • अनुसंधान और परामर्श कार्य आईएसओ-9001 के लिए प्रमाणीकृत किए गए हैं।
  • एएसटीए (एसोसिएशन फॉर शार्ट सर्किट टेस्टिंग ऑथोरिटीज), यूके
  • सीपीआरआई को बहरीन, सऊदी अरब, मिडिल ईस्ट, फार ईस्ट और अफ्रीका के देशों में विभिन्न विद्युत यूटिलिटियों द्वारा अनुमोदित जांच घर के रूप में मान्यता दी गई है।
  • मीटर और यूटिलिटी ऑटोमेशन के लिए-डीएलएमएस यूजी, यूसीए आईयूजी में सदस्य।

गत कुछ वर्षों से, सीपीआरआई ने पारेषण ओर वितरण प्रणालियों, शार्ट सर्किट जांच, इन्सुलेशन सामग्री, विद्युत गुणवत्ता, ऊर्जा मीटरिंग, ऊर्जा लेखा परीक्षा, पारेषण लाइन टावर डिजाइन, कंडक्टर वाईब्रेशन अध्ययन, विद्युत प्रणालियां, स्काडा एवं वितरण ऑटोमेशन, सब-स्टेशन, उपस्कर और ऊर्जा मीटर की प्रोटोकॉल जांच, ट्रांसफार्मर ऑयल रीक्लेमेशन एवं जांच, डायग्नोस्टिक, स्थिति की निगरानी तथा उपस्कर के शेष जीवन का अनुमान, विद्युत प्रणाली प्रयोग के लिए नई सामग्री, अल्ट्रा हाई वोल्टेज (यूएचवी) जांच, शार्ट सर्किट जांच, हाई वोल्टेज (एचवी) जांच तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की है।

संस्थान के अन्य कार्य निम्नलिखित हैं:

  • विद्युत बोर्डों और यूटिलिटियों के लिए तृतीय पक्ष जांच सेवाएं
  • स्थिति निगरानी और डॉयग्नोस्टिक सेवाएं
  • ऊर्जा लेखा परीक्षा
  • कस्टमकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • भार प्रवाह, शार्ट सर्किट और रिले समन्वय कोशामिल करने वाले विद्युत प्रणाली अध्ययन
  • विद्युत उपस्करों की भूकंप संबंधी योग्यता
  • उद्योग के लाभों के लिए उपयोगी मूल्य वाले उत्पादों का उपयोग ओर औद्योगिक कचरा
  • सब-स्टेशन घटकों और ऊर्जा मीटर की प्रोटोकॉल जांच
  • पारेषण लाइन और सब-स्टेशनों के निकट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हस्तक्षेप (ईएमआई), इलेक्ट्रिक एंड मैग्नेटिक क्षेत्रीय माप

 

पुनर्गठित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आर-एपीडीआरपी)

सीपीआरआई को पावर फाइनेंस कारपोरेशन, जो कि आर-एपीडीआरपी के कार्यान्वयन हेतु विद्युत मंत्रालय की नोडल एजेंसी है, द्वारा पुनर्गठित एपीडीआरपी (आर-एपीडीआरपी) के लिए सूचना प्रौद्योगिकी परामर्शक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी परामर्श का कार्य राज्य के भीतर विभिन्न परियोजना क्षेत्रों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की तैयारी में राज्य यूटिलिटियों को सहायता देना और सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना स्थापित करने में भी सहायता देना है ताकि यूटिलिटी व्यावसायिक प्रक्रिया अर्थात् मीटरिंग, बिलिंग एवं एकत्रीकरण का कार्य आर-एपीडीआरपी के प्रथम चरण में पूर्ण रूप से सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम हो।

संस्थान ने कर्नाटक सर्कल टीपीआईईए-ईए (तृतीय पक्ष जांच एवं मूल्यांकन एजेंसी-ऊर्जा लेखा) के लिए प्रतिष्ठा वाला एसाइनमेंट प्राप्त किया है।

आरजीजीवीवाई परियोजना

सीपीआरआई को चमाराजनगर, कदागु, गुलबर्ग, बेलगांव, मांड्या, मैसूर, हसन और कर्नाटक राज्य के उत्तर कन्नड़ जिलों और केरल राज्य के इडुक्की जिले में आरजीजीवीवाई कार्यक्रम की परियोजना निगरानी तथा गुणवत्ता आश्वासन के लिए परामर्शक के रूप में नियुक्त किया गया है।

स्काडा/डीएमएस परामर्श

पीएफसी ने आर-एपीडीआरपी वित्त पोषण के अंतर्गत स्काडा/डीएमएस परामर्शक (एमडीसी) के रूप में सीपीआरआई को चयनित एवं सूचीबद्ध किया है। सीपीआरआई केपीटीसीएल और बेस्कॉम के लिए इसी प्रकार की परियोजनाओं की देखरेख कर रही है। इसके अलावा, सीपीआरआई ने प्रतिष्ठा वाला एसाइनमेंट प्राप्त किया है और चार वितरण कंपनियों तक फैले हुए सात शहरों के लिए आंध्र प्रदेश डिस्कॉम (एपीसीपीडीसीएल, एपीएनपीडीसीएल, एपीईपीडीसीएल, एपीएसपीडीसीएल) के लिए स्काडा/डीएमएस परामर्शक के रूप में नियुक्त किया गया है। कार्य के विस्तार में डीपीआर की तैयारी, स्काडा कार्यान्वयन एजेंसी चयन में यूटिलिटी को दिशानिर्देशित करना, कार्यान्वयन एवं हैंडहोल्डिंग का निरीक्षण शामिल है।

स्मार्ट ग्रिड के लिए परामर्श

सीपीआरआई ने बेस्कॉम में स्मार्ट ग्रिड पायलट परियोजना के प्रारूप एवं विकास के लिए परामर्श सेवाओं हेतु यूएसएआईडी के अंतर्गत मेसर्स टेट्रा टेक इंक (इंडिया) से एक प्रतिष्ठित ठेका प्राप्त किया है। यह पहली बार है कि स्मार्ट ग्रिड पर एक पायलट परियोजना भारतीय विद्युत यूटिलिटी में तैयार की जा रही है। सीपीआरआई को भारत की पहली स्मार्ट ग्रिड परियोजना के लिए परामर्शक के रूप में चुना गया है।

टीओडी परामर्श

पीएफसी ने, भारत सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम आर-एपीडीआरपी के अंतर्गत देश (टीओडी परामर्शक) में औद्योगिक, घरेलू और अन्य वर्गों के लिए दिन के समय की मीटरिंग/प्रशुल्क की वर्तमान स्थिति और भावी रूपरेखा के अध्ययन के लिए टीओडी परामर्शक के रूप में सीपीआरआई की नियुक्ति की है।

प्रशिक्षण

सीपीआरआई के पास सिमुलेशन, डायगनोस्टिक, प्रणाली विश्लेषण और जांच के क्षेत्र में विशेषज्ञता है। सीपीआरआई की प्रयोगशालाओं में विद्युत प्रणाली सिमुलेशन, शार्ट सर्किट जांच, उपस्करों की डायगनोस्टिक, सामग्री इंजीनियरी, भूकंप संबंधी योग्यता आदि के लिए आवश्यक आधुनिक उपस्कर हैं। सीपीआरआई के पास अपने-अपने रूचि वाले क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव के साथ-साथ पाठ्यक्रम/सेमिनार प्रस्तुत करने में व्यापक अनुभव के साथ विद्युत क्षेत्र से संबंधित विभिन्न विषयों में अनुभव रखने वाली फैकल्टी है। संस्थान प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सिम्पोजियम, कार्यशालाएं, सेमिनार/सम्मेलनों आदि का नियमित रूप से आयोजन करना है।

पूंजीगत परियोजनाएं

सीपीआरआई को इन हाउस आर एंड डी, आरएसओपी और एनपीपी स्कीमों जैसी विभिन्न स्कीमों के अंतर्गत जांच सुविधाओं और एंड डी परियोजनाओं की स्थापना एवं उन्नयन से संबंधित परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लक्ष्य से विद्युत मंत्रालय द्वारा 11वीं योजना स्कीम के अंतर्गत 320 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसमें से, अब तक 188.88 करोड़ रुपये की राशि की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है और 4 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी है तथा 4 अन्य प्रगति पर हैं।

अनुसंधान एवं विकास

विशेष रूप से विद्युत क्षेत्र के लिए एप्लाइड अनुसंधान हेतु विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय अर्थात् केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) का सृजन किया गया है और अनिवार्य अनुसंधान स्कीमें बनाने के लिए आयोजना शीर्ष के अंतर्गत उन्हें निधियां उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

शैक्षिक संस्थानों, यूटिलिटियों और उद्योग के साथ सहयोगी अनुसंधान करने के लिए अद्यतन अवसंरचनात्मक सुविधाएं अर्थात् सेंटर फॉर कोलाबोरेटिव एंड एडवांस्ड रिसर्च (सीसीएआर) की स्थापना की गई है।
 

i)  योजनागत आर एंड डी परियोजनाएं

सीपीआरआई उत्पादन, पारेषण, वितरण और एलाइड क्षेत्रों में उत्पाद/प्रक्रिया विकास, जांच सुविधाओं की वृद्धि के लक्ष्य के साथ इन हाउस आर एंड डी को शुरू करता है। वर्तमान में संस्थान में 17 अनुसंधान परियोजनाएं कार्यान्वयनाधीन हैं।

ii)  विद्युत संबंधी अनुसंधान स्कीमें

संस्थान द्वारा विद्युत संबंधी अनुसंधान स्कीम, लघु आर एंड डी कार्यक्रमों को स्पांसर करने वाली विद्युत मंत्रालय की अनुसंधान निधि का भी प्रबंधन किया जा रहा है। स्कीम के अंतर्गत, चिन्हित अनुसंधान क्षेत्रों से विभिन्न आर एंड डी परियोजनाओं को यूटिलिटियों और आर एंड डी संगठनों को निधियां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन, निगरानी एवं समीक्षा स्कीम के प्रबंधन में सीपीआरआई के मुख्य दायित्व हैं। वर्तमान में, 13 परियोजनाएं विभिन्न संगठनों में कार्यान्वयन के अधीन हैं।

iii)  राष्ट्रीय परिदृश्य योजना के अंतर्गत अनुसंधान परियोजना

राष्ट्रीय परिदृश्य योजना रिपोर्ट अनुसंधान एवं विकास के प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित करने, 2012 तक और उसके बाद विद्युत क्षेत्र में निधि की मांग को चिन्हित करने के लिए विद्युत मंत्रालय द्वारा वर्ष 2007 में लाई गई थी। इसके पश्चात्, कई अनुसंधान संगठन पूल्ड कर दिए गए थे और बहुत सी आर एंड डी परियोजनाएं कार्यान्वयन हेतु तैयार एवं अनुमोदित की गई थीं। वर्तमान में, भारत हैवी इलेक्ट्रिक्ल्स लिमिटेड (भेल), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडीएसी), ईएमसीओ, नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेट्री (एनएमएल), सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीच्यूट (सीपीआरआई) और इलेक्ट्रिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (ईआरडीए) में 5 मुख्य परियोजनाएं प्रगति के विभिन्न चरणों में हैं। दूसर चरण में, 9.22 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 6 परियोजनाओं को अनुमोदन प्रदान किया गया है और आईआईटी रुड़की, एनएचपीसी, सीडीएसी, सीआईटी एंड टीएनईबी, क्रॉम्पटन एंड ग्रीव्स में कार्यान्वयनाधीन हैं।