पारेषण अवलोकन

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भारत में विद्युत क्षेत्र त्वरित गति से विकास कर रहा है। वर्तमान वर्ष 2017-18 (दिनांक 30.06.2017 तक) में व्यस्ततम मांग लगभग 159.8 गीगावाट है और संस्थापित क्षमता 330.2 गीगावाट थी, इसमें थर्मल (66.8%), हाइड्रो (13.5%), नवीकरणीय (17.7%) और न्यूक्लियर (2.1%) शामिल है।

भारत में विद्युत उत्पादन के लिए प्राकृतिक संसाधन विभिन्न क्षेत्रों में असमान रूप से फैला हुआ एवं कुछ पॉकिटों तक सीमित है। हाइड्रो संसाधन हिमालय की तराई एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में अवस्थित है। कोयले का भंडार झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में जमा है, जबकि, लिग्नाइट तमिलनाडु एवं गुजरात में पाया जाता है। साथ ही बहुत से विद्युत स्टेशन जोकि गैस, सौर, पवन आदि जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादन करते हैं, देश के विभिन्न हिस्सों में संस्थापित हैं।

केन्द्रीय पारेषण यूटिलिटी (सीटीयू), पावरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड), अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) की आयोजना के लिए उत्तरदायी है। इसीप्रकार, राज्य पारेषण यूटिलिटियां (एसटीयू) (अर्थात राज्य ट्रांसको/एसईबी) अंतर-राज्य पारेषण प्रणाली के विकास के लिए उत्तरदायी हैं।

विभिन्न विद्युत उत्पादन स्टेशनों द्वारा उत्पादित विद्युत की निकासी के लिए कई वर्षों से व्यापक नेटवर्क पारेषण लाइनों का विकास कर उपभोक्ताओं में वितरित किया जाता है। विद्युत की मात्रा एवं शामिल दूरी के आधार पर उपयुक्त वोल्टेज की लाइनें बिछाई जाती हैं। नाममात्र की अतिरिक्त उच्च वोल्टेज लाइनें ±800 केवी एचवीडीसी एवं 765 केवी, 400 केवी, 230/220 केवी, 110 केवी और 66 केवी एसी हैं। इन्हें सभी एसईबी केंद्रीय क्षेत्र की उत्पादन,  पारेषण एवं वितरण युटिलिटियों द्वारा संस्थापित किया गया है।

वर्ष 2017-18 (अप्रैल-जून 2017) के दौरान 6,855 सर्किट किमी. (सीकेएम) की पारेषण लाइनों को चालू किया गया है। यह वर्ष 2017-18 के लिए निर्धारित 23,086 सीकेएम के वार्षिक लक्ष्य का 29.7% है। इसी प्रकार ट्रांसफार्मेशन क्षमता वर्ष 2017-18 (अप्रैल-जून 2017) के दौरान 23,305 एमवीए हो गया है जोकि वर्ष 2017-18 के लिए 53,978 एमवीए के निर्धारित वार्षिक लक्ष्य का 43.2% है।

देश में 220 केवी और उच्च वोल्टेज स्तरों की पारेषण प्रणाली की क्षमता 30 जून, 2017 को 3,74,706 सर्किट कि.मी. पारेषण लाइन एवं सब स्टेशनों की ट्रांसफोर्मेशन क्षमता 7,64,070 एमवीए थी।

दिनांक 30.06.2017 की स्थिति के अनुसार, अंतर-क्षेत्रीय लिंकों की कुल पारेषण क्षमता 76,550 मेगावाट है ।

पारेषण लाइनें केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए)/ केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी)/ राज्य विद्युत विनियामक आयोगों (एसईआरसी) के विनियमों/ मानकों के अनुसार प्रचालित होती है। तथापि, कुछ मामलों में वोल्टेज स्थिरता, एंगुलर स्थिरता, लूप फ्लो, लोड  फ्लो पैटर्न एवं ग्रिड सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पारेषण लाइनों पर लोडिंग को सीमित करना पड़ सकता है। अन्य बातों के साथ-साथ, विद्युत अधिशेष राज्य, दक्षिणी क्षेत्र में विद्युत की आपूर्ति में कुछ रूकावटों को छोड़कर, पूरे देश में विद्युत की कमी वाले राज्य युटिलिटियों को अपनी अधिशेष विद्युत की आपूर्ति करने में सक्षम हैं।

पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपेशन लिमिटेड (पोसोको) अत्याधुनिक एकीकृत लोड डिस्पैच एवं कम्युनिकेशन सुविधाओं के माध्यम से राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र (एनएलडीसी) और इसके पांच क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्र (आरएलडीसी) के द्वारा राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय ग्रिड का प्रबंधन करता है।

 

केंद्रीय पारेषण यूटिलिटी (सीटीयू): पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) :

विद्युत मंत्रालय के अधीन पावरग्रिड कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) देश की केंद्रीय पारेषण यूटिलिटी (सीटीयू) एवं एक नवरत्न कंपनी है। यह अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) की आयोजना, कार्यान्वयन, प्रचालन एवं अनुरक्षण के उत्तरदायित्व सहित विद्युत पारेषण व्यापार का कार्य करती है और राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पावर ग्रिडों का प्रचालन करती है। पावरग्रिड भारत सरकार के 57.90% के स्वामित्व एवं शेष स्वामित्व संस्थागत निवशकों एवं आम लोगों वाली एक सूचीबद्ध कंपनी है।

30 जून, 2017 की स्थिति के अनुसार, पावरग्रिड अपने स्वामित्व में लगभग 1,40,723 सीकेटी अति उच्च वोल्टेज (ईएचवी) पारेषण लाइनों और 2,93,673 एमवीए से अधिक की ट्रांसफार्मेशन क्षमता सहित 222 ईएचवी एसी एवं एचवीडीसी सब-स्टेशनों के माध्यम से पूरे देश में प्रसार करती है। इसका व्यापक पारेषण नेटवर्क चक्र देश में कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 45% है। इस व्यापक पारेषण नेटवर्क की उपलब्धता को वैश्विक मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक प्रचालन एवं अनुरक्षण की तैनाती के द्वारा निरंतर 99% से अधिक की दर पर बनाये रखा जाता है।

वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान पावरग्रिड ने लगभग 21,281 करोड़ रु. का टर्नओवर एवं 6,027 करोड़ रु. का निवल लाभ अर्जित किया है। दिनांक 31.12.16 को कंपनी की स्थिर परिसंपत्ति भी बढ़कर 1,65,757 करोड़ रु. हो गयी है।

मुख्य रूप से संसाधन संपन्न और तटीय क्षेत्रों अर्थात छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, सिक्किम, झारखंड, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में आने वाले विभिन्न स्वतंत्र विद्युत उत्पादनकर्ताओं (आईपीपी) के आवश्यक थोक विद्युत निकासी को पूरा करने के लिए 11 उच्च क्षमता वाले विद्युत पारेषण कॉरिडोरों (एचसीपीटीसी) का निर्धारण किया गया है। इन कॉरिडोरों का कार्यान्वयन उत्पादन परियोजनाओं के साथ चरणबद्ध तरीके से शुद्ध किया गया है।

देश की कुल अंतर क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता (220 केवी और उससे अधिक) XIवी योजना के 27,150 मेगावाट से बढ़कर XIIवी योजना में 75,050 मेगावाट हो गई है । ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन में पावरग्रिड के इस प्रयास ने उत्तरी क्षेत्र में बिजली की कीमतों में कमी लाने और बिजली की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है ।  

XIIवी योजना के दौरान पावरग्रिड ने अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के विकास के लिए 1,10,000 करोड़ रु. के लक्ष्य की जगह 1,12,600 करोड़ रु. की पूंजी निवेश की है। XIIवी योजना के दौरान, इसमें लगभग 45,900 सीकेएम पारेषण लाइन और लगभग 1,64,000 एमवीए ट्रांसफार्मेशन क्षमता शामिल की गई है जिनका लक्ष्य क्रमशः 40, 000 सीकेएम  एवं 1,00,000 एमवीए था ।

कंपनी वित्तीय संस्थानों के साथ उत्कृष्ट क्रेडिट रेटिंग, जिसमें संसाधन जुटाव के संबंध में बेहतर स्थिति में है। पावरग्रिड हरित ऊर्जा कॉरिडोरों के आईएसटीएस के भाग को कार्यान्वयन के माध्यम से पूरे देश में नवीकरणीय उत्पादन के ग्रिड इंटरकनैक्शन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

देश में पारेषण नेटवर्क के विकास के संबंध में कनसर्विंग राइट-आफ-वे (आरओडब्यू), प्राकृतिक संसाधनों पर न्यूनतम प्रभाव, लागत प्रभावी पारेषण कॉरिडोर का समन्वित विकास, अपेक्षित विद्युत अंतरण के साथ अंतरण क्षमता लाइनों का उन्नयन प्रमुख चिंता वाले क्षेत्र हैं। इस दिशा में, कंपनी ने ±800 केवी एचवीडीसी एवं 1200 केवी यूएचवीएसी की उच्च पारेषण वोल्टेज पर कार्य कर रही है। हाल ही में, दोनों छोर पर 1500 मेगावाट (पोल-I) एचवीडीसी टर्मिनल के साथ असम से आगरा (उत्तर प्रदेश) में विश्वनाथ चरियाली से जुड़ी लगभग 2000 किमी. लंबी +800 केवी, 600 मेगावाट एचवीडीसी बाई-पोल शुरू की गयी है। इसी प्रकार से,  1200 केवी के नेशनल टेस्ट स्टेशन (एनटीएस) के द्वारा विद्युत प्रवाह 18.05.2016 को बीना, मध्य प्रदेश में कमीशन किया गया।

पावरग्रिड ने अपने राजस्व को मजबूत करनेऔर अपने स्टोकहोल्डरों के मूल्य सृजन करने के लिए अपने देशव्यापी पारेषण अवसंरचना का टेलिकॉम व्यापार, लीवरेजिंग को विविधीकृत किया है। कंपनी जम्मू एवं कश्मीर तथा पूर्वोत्तर राज्यों इत्यादि के दूरस्थ क्षेत्रों सहित सभी मेट्रो, प्रमुख शहरों एवं नगरों केलिए बैकबोन कनैक्टिविटी प्रदान करता है। कुल नेटवर्क कवरेज-39,662 किमी. से अधिक है और वर्तमान बिंदुओं की संख्या (पीओपी) की स्थिति 662  हैं। वर्ष 2015-16 के लिए टेलिकॉम बैकबोन उपलब्धता लगभग 99.5% है।

पावरग्रिड ने भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित एनकेएन (राष्ट्रीय जानकारी नेटवर्क) परियोजना डिवाइस को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिससे पूरे देश के सभी जानकारी केंद्रों अर्थात इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस (आईआइएससी) इत्यादि को जोड़ना है। कंपनी ने हाई-स्पीड कनैक्टिविटी पर सिक्किम सहित पूर्वोत्तर राज्यों में टेलिकम्यूनिकेशन कनैक्टिविटी का सुधार करने के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के साथ करार पर हस्ताक्षर किये हैं। इसमें विद्यमान हाई टेंशन इलैक्ट्रिक पारेषण नेटवर्क के ऊपर ऑप्टिकल फाइबर मीडिया संबंधी बैण्डविड्थ के प्रावधान की परिकल्पना है। प्रस्तावित कनैक्टिविटी के पूरा होने के पश्चात, सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्रों में निरंतर टेलिकॉम सर्विसेज की विश्वसनीयता में सुधार होगा।

देश में 250,000 ग्राम पंचायत (जीपी) को जोड़ने की भारत सरकार की योजना के एक भाग के रूप में, नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) परियोजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों में से एक कार्यान्वयन एजेंसी है और उन्हें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और ओडिशा राज्यों में एनओएफएन नेटवर्क का विकास और रख-रखाव का कार्य सौपा गया है।

इसके अतिरिक्त, पावर ग्रिड, देश के विभिन्न हिस्सों में भारत सरकार की ओर से दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) और एकीकृत विद्युत विकास स्कीम (आईपीडीएस) कार्यों के माध्यम से वितरण सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

पावरग्रिड दक्षिण एशिया में एक मजबूत प्लेयर के रूप में उभरा है और आपसी लाभों के लिए संसाधनों की प्रभावपूर्ण उपयोगिता के लिए सार्क ग्रिड का गठन करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में, भारत एवं भूटान, भारत एवं नेपाल और भारत एवं बांग्लादेश के बीच विभिन्न इलैक्ट्रिकल इंटरकनैक्शन विद्यमान है। इसके अतिरिक्त, सीमाओं पर विद्युत का सब-स्टेन्शियल एक्सचेंज के लिए भारत एवं भूटान और भारत एवं नेपाल के बीच इंटरकनैक्शन का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।

पावरग्रिड बहुत से दक्षिण एशियन, अफ्रीकन और मध्यपूर्व देशों सहित विभिन्न राष्ट्रीय क्लाइंट एवं अंतराष्ट्रीय क्लाइंट को परामर्शी सेवाएं ऑफर करता है।

अक्षय ऊर्जा उत्पादन के एकीकरण और संचालन के प्रबंधन हेतु पावरग्रिड प्रतिष्ठित एवं स्टेट ऑफ थे आर्ट अक्षय ऊर्जा प्रबंधन केन्द्रों (आरईएमसी) का क्रियान्वयन कर रहा है जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा की भविष्यवाणी से ऊर्जा संतुलन और उत्पादन के समयबद्धन के लिए कई गतिविधियों को शामिल किया जाएगा । स्मार्ट पारेषण में, पावरग्रिड पूरे देश में सभी क्षेत्रों में विभिन्न स्थलों पर पीएमयू (फेजर मेजरमेंट यूनिट) की संस्थापना के माध्यम से अपने वाइड एरिया मेजरमेंट सिस्टम (डब्लूएएमएस) में सिंक्रोफेसर टेक्नोलॉजी का कार्यान्वयन किया है जो ग्रिड घटनाओं जैसे ग्रिड रोबसनेस, कंपन, एंगुलर/वोल्टेज स्थिरता, प्रणाली मार्जिन इत्यादि के साथ-साथ निर्णय सहायक माध्यमों की बेहतर दर्शन और स्थितिक जागरूकता को सुगम बनाता है। पावरग्रिड प्रतिष्ठित ''इंडिया स्मार्ट ग्रिड टास्कफोर्स'' स्मार्ट ग्रिड से संबंधित सरकार की गतिविधियों के लिए सचिवालय में नोडल प्वाइंट के रूप में भी कार्य करता है।